Tuesday, August 16, 2022

यूपी विधान परिषद में 11 सीटों में से 6 सीटों पर BJP का कब्जा

उत्तर प्रदेश के विधान परिषद के चुनाव में बीजेपी ने जीत का परचम फहराया है. सूबे की 6 शिक्षक और 5 स्नातक कोटे की कुल 11 सीटों पर हुए चुनाव में बीजेपी ने 6 सीटें जीती हैं, जिनमें दोनों कोटे की 3-3 सीटें शामिल हैं. वहीं, सपा ने एक शिक्षक और दो स्नातक कोटे की मिलाकर कुल तीन सीटों पर अपना कब्जा जमाया है जबकि दो दो शिक्षक कोटे की सीटों पर निर्दलीय को जीत मिली है. इस चुनाव में मिली जीत से उच्च सदन में बढ़ी बीजेपी की ताकत बढ़ी है, लेकिन अभी भी बहुमत के आंकड़े से पार्टी काफी पीछे हैं.

लखनऊ क्षेत्र की स्नातक कोटे की सीट से बीजेपी के अवनीश कुमार सिंह, आगरा क्षेत्र की स्नातक सीट पर बीजेपी के मानवेंद्र सिंह ‘गुरु जी’ और मेरठ स्नातक क्षेत्र से बीजेपी के दिनेश गोयल ने जीत हासिल की. वहीं, वाराणसी खंड स्नातक क्षेत्र से सपा के आशुतोष सिन्हा और झांसी-इलाहाबाद खंड स्नातक क्षेत्र से सपा के मान सिंह यादव ने जीत दर्ज की. ऐसे में वाराणसी और झांसी-इलाहाबाद क्षेत्र की स्नातक सीट सपा ने बीजेपी से छीनी है जबकि आगरा क्षेत्र की स्नातक क्षेत्र की सीट सपा को गंवानी पड़ी है. मेरठ स्नातक सीट पर पिछले चार बार से निर्दलीय जीत रहे हेम सिंह पुंडीर और लखनऊ क्षेत्र से पिछली बार जीती निर्दलीय कांति सिंह का वर्चस्व तोड़ने में बीजेपी कामयाब रही.

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शिक्षक कोटे की छह सीटों पर विधान परिषद चुनाव हुए हैं, जिनमें से तीन सीटें बीजेपी, एक सपा और दो निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीती है. बीजेपी पहली बार शिक्षक कोटे की छह सीटों में से चार पर प्रत्याशी उतारे थे, जिनमें मेरठ, आगरा, बरेली और लखनऊ सीट थी. बीजेपी ने वाराणसी सीट पर निर्दलीय चेतनारायण सिंह को समर्थन किया था जबकि गोरखपुर में पार्टी चुनाव नहीं लड़ी. बीजेपी शिक्षक कोटे की तीन सीटें बरेली, मेरठ और लखनऊ जीतने में कामयाब रही है जबकि सपा को एक वाराणसी सीट मिली है. इसके अलावा गोरखपुर में शर्मा गुट के ध्रुव कुमार त्रिपाठी जीते हैं जबकि आगरा से निर्दलीय डॉ. आकाश अग्रवाल ने जीत हासिल की है.

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उत्तर प्रदेश विधान परिषद में कुल 100 सदस्य हैं, जिनमें बहुमत के लिए 51 का आंकड़ा चाहिए. चुनाव से पहले के आंकड़े देखे तो सपा के 52, बीजेपी के 19, बसपा के 8, कांग्रेस के दो, अपना दल सोनेलाल के एक, शिक्षक दल के एक और तीन निर्दलीय सदस्य हैं. इसके अलावा कुल 14 सीटें खाली थीं, जिनमें पांच स्नातक और 6 शिक्षक कोटे की सीटों पर चुनाव हुए हैं. चुनाव के नतीजे के बाद अब सपा के सदस्यों की संख्या 55 हो गई जबकि बीजेपी के सदस्यों की संख्या बढ़कर 25 हो गई है. वहीं, बसपा और कांग्रेस की स्थिति जस की तस है.

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उत्तर प्रदेश विधान परिषद की तीन सीटें खाली हैं. बदायूं जिले की स्थानीय निकाय प्रतिनिधियों के द्वारा चुनी जाने वाली सीट खाली है. इसके अलावा नसीमुद्दीन सिद्दीकी की सदस्यता चले जाने से दूसरी सीट खाली रह गई है. ये बसपा से एमएलसी थे, लेकिन उनके कांग्रेस में शामिल हो जाने के चलते सदस्यता चली गई थी. इसके अलावा तीसरी खाली सीट मनोनीत सदस्य की है. सपा के राम सिंह यादव का कोरोना से निधन हो गया था. राज्यपाल द्वारा मनोनीत किये जाने वाले 10 सदस्यों में से एक ये भी थे.

विधान परिषद में 6 साल के लिए सदस्य चुने जाते हैं. देश के महज 6 राज्यों यूपी, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में ही विधान परिषद है. यूपी में परिषद की 100 सीटें हैं. सूबे में एलएलसी चुनाव पांच अलग-अलग तरीके से चुनकर पहुंचते हैं. 100 में से 36 सीट स्थानीय निकाय के प्रतिनिधि के द्वारा चुनी जाती हैं. इसके अलावा कुल 100 सीटों में से 1/12 यानी 8-8 सीटें शिक्षक और स्नातक क्षेत्र के लिए आरक्षित हैं. 10 विधान परिषद सदस्य को राज्यपाल मनोनीत करते हैं, जो अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ होते हैं. बाकी बची 38 सीटों पर विधानसभा के विधायक वोट करते हैं और विधान परिषद के विधायक चुनते हैं.

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उत्तर प्रदेश में 11 विधान परिषद सीटें अगले साल जनवरी में रिक्त हो रही है. इनमें से छह सीटों पर सपा जबकि दो सीटें पर बसपा और तीन सीटों पर बीजेपी के सदस्य हैं. यूपी के मौजूदा विधायकों की संख्या के आधार पर 11 विधान परिषद सीटों में से बीजेपी 8 से 9 सीटें जीतने की स्थिति में है. वहीं, सपा की एक सीट पर जीत तय है और दूसरी सीट से उसे निर्दलीय सहित अन्य दलों के समर्थन की जरूरत होगी. इसके अलावा दो सीटों पर उपचुनाव होंगे. इसके बाद बीजेपी का आंकड़ा जरूर उच्च सदन में बढ़ेगा, लेकिन फिर भी बहुमत से दूर रहेगी. ऐसे में बीजेपी को विधान परिषद में बहुमत के लिए स्थानीय प्रतिनिधियों के द्वारा होने वाले चुनाव तक का इंतजार करना पड़ेगा.

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