Sunday, November 28, 2021

देश की सुरक्षा के साथ सैनिकों की हिफाजत और तनाव कम करते ये कुत्ते…!

कश्मीर में तैनात 44वीं राष्ट्रीय राइफल के जवानों के लिए कुत्ते सबसे अच्छे दोस्तों हैं. क्योंकि वे खतरे और तनाव दोनों को दूर रखने का काम करते हैं. दिन भर गश्त लगाने के बाद जवान जब लौटते हैं तब लैब्राडोर प्रजाति के रॉश के साथ खेलकर उन्हें ऊर्जा मिलती है. राष्ट्रीय राइफल (आरआर) के जवानों के साथ रॉश समेत छह कुत्ते देश को सुरक्षित रखने के लिए दिन रात मेहनत करते हैं.

बल की इकाई के साथ रॉश, तापी और क्लायड नामक कुत्ते दक्षिण कश्मीर के संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी रखते हैं. जिनमें पुलवामा का लासीपुरा, इमाम साहब और शोपियां शामिल हैं. जवानों के साथ मिलकर ये कुत्ते, आईईडी विस्फोटकों का पता लगाने, हिंसक भीड़ का पीछा करने और फरार आतंकवादियों का पता लगाने जैसे काम को बखूबी अंजाम देते हैं.

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44वीं आरआर के प्रमुख कर्नल ए के सिंह के अनुसार कुत्तों के दल ने आतंकवाद रोधी कई अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, और कई ऐसी घटनाओं को टालने में सफलता पाई है जिनमें सुरक्षा बलों के जवानों के लिए जान का खतरा हो सकता था. कर्नल सिंह ने कहा कि रॉश बल के लिए एक ‘सेलिब्रिटी’ की तरह है क्योंकि उसने पिछले साल हिजबुल मुजाहिदीन के एक वांछित आतंकवादी को पकड़ने में सहायता की थी.

सेना के अधिकारी भी इन कुत्तों का पूरा ख्याल रखते हैं. वर्तमान में ‘डिफेन्स इंटेलिजेंस एजेंसी’ के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल के जे एस ढिल्लों की वह तस्वीर खासी चर्चा में रही थी जिसमें वह ‘मेनका’ नामक कुतिया को सलामी दे रहे थे. अमरनाथ यात्रा के दौरान मेनका ने रास्ते को सूंघ कर संभावित विस्फोटकों के खतरे को निर्मूल किया था. कई आतंक रोधी अभियानों के लिए इन कुत्तों को बहादुरी के पुरस्कार मिल चुके हैं.

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सेना की इकाई में शामिल मानसी नामक चार साल की लैब्राडोर को मरणोपरांत ‘मेंशन इन डिस्पैच’ का प्रमाण पत्र दिया गया था. मरणोपरांत युद्ध पुरस्कार पाने वाली वह पहली श्वान थी. राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान देने की खातिर मानसी का नाम भारत के राजपत्र में उल्लिखित है.

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