Saturday, October 23, 2021

ईरानी वैज्ञानिक मोहसिन फखरीजादेह का कत्ल, सैटेलाइट का इशारा मिलते ही गोलियों से भूना

ईरानी वैज्ञानिक मोहसिन फखरीजादेह का कत्ल कर दिया गया. जिस तरीके से कत्ल की इस वारदात को अंजाम दिया गया, वो वाकई में हैरान करने वाला है. फखरीजादेह के कत्ल में ऐसी तकनीक का इस्तेमाल हुआ, उसका इस्तेमाल इससे पहले कहीं नहीं हुआ. चौंकाने वाली बात ये है कि जिस बंदूक से फखरीजादेह का कत्ल किया गया वो तो भले ही ईरान में एक ट्रक पर लगाई गई थी लेकिन उस ट्रक पर गन का ट्रिगर दबाने के लिए कोई इंसान मौजूद नहीं था. बल्कि धरती से लाखों किलोमीटर की दूरी पर आसमान में तैर रही एक सैटेलाइट का इशारा मिलते ही उस गन ने फखरीजादेह को गोलियों से भून डाला.

ईरानी वैज्ञानिक मोहसिन फखरीजादेह के कत्ल को लेकर पहले अलग-अलग कयास लगाए जा रहे थे. कहीं खबर ये थी कि फखरीजादेह के काफिले पर हमला कर उनको मौत के घाट उतारा गया तो कहीं कहा जा रहा था कि एक ट्रक पर लगी बंदूक से उनको निशाना बनाया गया था. हालांकि अब अधिकारिक तौर पर इस्लामिक रेवलूशन गार्डस कॉर्प्स के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल रमजान शरीफ ने दावा किया है कि फखरीजादेह का कत्ल सैटेलाइट से ऑपरेट होने वाले हथियार से किया गया है.

हर कोई हैरान है कि कैसे एक बंदूक का निशाना इतना अचूक हो सकता है कि वो चलती कार में जा रहे एक शख्स की जान ले सके. चौंकाने वाली बात ये भी है कि जब फखरीजादेह का क़त्ल हुआ उस वक़्त उस कार में उनकी पत्नी भी मौजूद थीं जो उनसे कुछ इंच की दूरी पर बैठी हुई थीं लेकिन इस हमले में उनको कोई नुकसान नहीं पहुंचा.

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बताया जा रहा है कि हमले के दौरान फखरीजादेह पर 13 राउंड फायरिंग की गई और सब के सब निशाने अचूक थे यानि जब फायर हुए तो वो एक सेंटीमीटर भी निशाने से इधर-उधर नहीं हुआ. अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि कत्ल में इस्तेमाल किया गया हथियार इतना खतरनाक था कि बचने की कोई गुंजाइश बाकी नहीं छोड़ी गई थी. एजेंसियों की खबरों के मुताबिक फखरीजादेह के कत्ल में हाल में ही बनाई गई गन स्मेश होपर का इस्तेमाल किया गया था.

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स्मेश होपर बंदूक के चर्चे आज हर कहीं हो रहे हैं. क्योंकि इसकी खासियत ही कुछ ऐसी है. ये बंदूक न सिर्फ ऑटोमैटिक है बल्कि रिमोट कंट्रोल से भी चल सकती है. साथ ही ये निशाने को खुद ही स्कैन कर लॉक कर लेती है. बुलेटप्रूफ गाड़ी में भी इससे बच पाना मुश्किल है. आपको बताते चलें कि कुछ दिन पहले ही इजराइल की एक कंपनी ने इस मैन पोर्टेबल ऑटोमेटिक बंदूक को लॉन्च किया था और ये भी एक कारण है कि इजरायल के ऊपर आज कत्ल के आरोप लग रहे हैं. इजरायली कंपनी ने दावा किया था कि ये बंदूक अपने आप लक्ष्य को स्कैन कर निशाने को लॉक कर सकती है. जिसके बाद दूर बैठा ऑपरेटर टेबलेट जैसी वायरलेस डिवाइस से जब चाहे तब फायर कर सकता है.

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इस गन को इजरायली कंपनी ने विकसित किया था. इस गन को लाइट रिमोट कंट्रोल्ड वेपन स्टेशन (LRCWS) के नाम से भी जाना जाता है. यह सिस्टम SMASH 2000 कम्प्यूटराइज़ गनसाइट और दूर से नियंत्रित किए जाने वाले माउंट से मिलकर बना है. जिसे किसी ट्रायपॉड, जमीन या किसी गाड़ी के ऊपर लगाया जा सकता है. गनसाइट को किसी ऑटोमेटिक गनमाउंट की जरूरत नहीं होती है. यह अपने आप ही लक्ष्य को ढूंढकर उसे लॉक कर लेती है. जिसके बाद दूर बैठे ऑपरेटर को जब लगता है कि अब फायर करने से लक्ष्य को ज्यादा नुकसान होता, तब वह रिमोट कंट्रोल के जरिए फायर कर सकता है. इससे पहले यह दावा ईरान की अरबी स्टेट न्यूज एजेंसी अल-आलम ने भी किया था. रिपोर्ट्स के मुताबिक फखरीजादेह की हत्या रिमोट-कंट्रोल हथियार से की गई थी. यह उनसे 150 मीटर दूर खड़ी गाड़ी में लगा था. इस बात की पुष्टि बाद में की गई थी कि घटनास्थल पर कोई और शख्स मौजूद नहीं था. शरीफ ने कहा है कि हत्या को अडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट से अंजाम दिया गया, जिसे सैटेलाइट से कंट्रोल किया जा रहा था.

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फखरीजादेह की हत्या का आरोप इजरायल पर है. यह दावा किया गया है कि इजरायल की जासूसी एजेंसी मोसाद ने इस घटना को अंजाम दिया था. इसके बाद इजरायल से बदले की खुली चेतावनी भी दी गई. कुछ ईरानी अधिकारियों ने इसमें अमेरिका और सऊदी अरब के मिले होने का दावा भी किया है. ईरान और इजराइल के बीच रिश्तों में कितनी खटास है ये बात जगजाहिर है. ईरान पहले ही कह चुका है कि वो अपने वैज्ञानिक की मौत का बदला जरुर लेगा. वक्त और तारीख वो खुद तय करेगा. इजराइल को इस हमले की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी. ईरानी एटमिक प्रोग्राम के गॉडफादर माने जाने वाले वैज्ञानिक मोहसिन फखरीजादेह के कत्ल से ईरान को भारी धक्का लगा है. दूसरी तरफ, अमेरिका के दबाव में कई अरब देश इजराइल को मान्यता दे रहे हैं. ये बात भी ईरान के लिए चिंता पैदा करने वाली है. ऐसा माना जा रहा है कि मुस्लिम देशों में अलग-थलग पड़े ईरान को अरब देश और तन्हा करना चाहते हैं ताकि मुस्लिम देशों के बीच अरब देशों का दबदबा बना रहे.

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