Friday, October 22, 2021

3 अक्टूबर को PM मोदी करेंगे अटल टनल का देश को समर्पित, जानें खासियत

अटल टनल रोहतांग दस साल बाद तैयार कर ली गई है। पीर पंजाल की पहाड़ियों में बनी इस टनल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को विधिवत देश की जनता को समर्पित करेंगे। नरेंद्र मोदी शनिवार सुबह करीब नौ बजे मनाली पहुंच जाएंगे व 11 बजे से पहले टनल का लोकार्पण कर देंगे। दस साल में बनकर तैयार हुई अटल टनल से लाहुल घाटी सहित चंबा की किलाड़ व पांगी घाटी में विकास की नई गाथा लिखी जाएगी। लेह लद्दाख में बैठे देश के प्रहरियों तक रसद पहुंचाना भी आसान होगा।

नौ किलोमीटर लंबी अटल टनल के निर्माण से लेह लद्दाख में सरहद तक पहुंचने के लिए 46 किलाेमीटर सफर कम हो गया है। हालांकि सालभर तो लेह-लद्दाख मनाली से नहीं जुड़ा रहेगा। लेकिन टनल निर्माण से मनाली लेह मार्ग की बहाली जल्द हो सकेगी और सफर भी सुगम होगा। यह टनल भारतीय सेना को मजबूती प्रदान करेगी। सेना को सीमा में पहुंचने के लिए समय कम लगेगा और सैन्य सामान पहुंचाना भी सरल होगा।

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रोहतांग दर्रे पर सुरंग के निर्माण की घोषणा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 3 जून 2000 को जनजातीय जिला लाहुल स्पीति के केलंग में की थी। साथ ही जून 2000 में अटल टनल के साउथ पोर्टल तक बनने वाली सड़क की आधारशिला भी रखी थी। जून 2010 में यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सोलंगनाला के धुंधी में टनल की आधारशिला रखी थी। तीन अक्‍टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका लोकार्पण करेंगे।

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टनल के निर्माण की लागत 1500 करोड़ रुपये थी। लेकिन काम में देरी होने और विकट परिस्थितियों ने इसकी लागत बढ़ा दी। अब यह प्रोजेक्ट करीब 3200 करोड़ में तैयार हुआ है। अटल के हिमाचल प्यार को देखते हुए प्रदेश सरकार के आग्रह पर केंद्र ने इस सुरंग का नाम अटल टनल रखा।

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इस टनल का निर्माण कार्य वर्ष 2010 में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के मार्गदर्शन में स्ट्रॉबेग एफकॉन कंपनी ने शुरू किया था। सर्दियों के दौरान माइनस 23 डिग्री सेल्सियस तापमान में कंपनी व बीआरओ के इंजीनियर व मजदूरों ने इसके निर्माण को पूरा किया है।

सर्दी के मौसम में बर्फबारी होने के बाद लाहुल घाटी देश दुनिया से कट जाती थी। रोहतांग दर्रे पर कई फीट बर्फ पड़ जाती थी, जिसे गर्मी के मौसम में वाहनों के लिए मुश्किल से बहाल किया जाता था। लेकिन अब लाहुल घाटी के लोग सालभर देश दुनिया से जुड़े रहेंगे।

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