Saturday, October 16, 2021

37वें दिन में पहुंचा किसानों का आंदोलन, हड़ताल से कारोबार ठप

केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ सूबा सरकार ने अपने कानून बना दिए। समस्या जस की तस। किसान आज भी समाधान के इंतजार में…आखिर दोनों सरकारें कब तुड़वाएंगी ये गतिरोध 2.48 लाख करोड़ के कर्ज में डूबे पंजाब की अर्थव्यवस्था और चरमरा रही है। सूबा सरकार खुद मानती है कि कोरोना के शुरू होने से लेकर अब तक 40 हजार करोड़ का नुकसान हो चुका है। किसानों के ट्रैक से उठने के बावजूद अभी तक मालगाड़ियां शुरू नहीं की गईं। इसके लिए प्रदेश सरकार केंद्र सरकार पर दोष मढ़ रही है और केंद्र सरकार राज्य से सुरक्षा की गारंटी मांग रही है।

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काेरोना से ठप पड़े कारोबार को दिवाली, गुरुपर्व आदि त्योहारों के सीजन में उबरने की आस थी। लेकिन प्रदेश और केंद्र सरकार के मिलकर हल न निकालने से अन्नदाता से लेकर व्यापारी-कारोबारी तक की कमर टूट रही। हमारे किसानों पर भी 1 लाख 20 हजार करोड़ का बैंक और आढ़तियों का पहले से कर्ज है। मालगाड़ियां न चलने से डीएपी, यूरिया समेत कई जरूरी वस्तुएं न आने से परेशानी और बढ़ गई है।

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इन सबसे उन्नत प्रदेश पीछे जा रहा है। गौरतलब है कि केंद्रीय कृषि कानूनों के समानांतर 3 नए कानून बनाने के बाद केंद्र और पंजाब सरकार में तनातनी ज्यादा बढ़ गई है। 37 दिन से कोई हल न निकलने से सूबे में अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। इन सबका खामियाजा किसानों, कारोबारियों और आमजन को भुगतना पड़ रहा है। इतना ही नहीं, प्रदेश में आय के स्रोत भी घटते जा रहे हैं।

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जल्द मालगाड़ियां न चलीं तो सूबे में यूरिया की कमी हो जाएगी, फसली सीजन के लिए 25 लाख टन यूरिया की जरूरत पड़ती है, जोकि कांडला पोर्ट के जरिए आता है। वहीं, डीएपी की 8 लाख टन की खपत है, जो ज्यादातर गुजरात से आती है। इनके अलावा किसानों को 1 लाख टन डाया की जरूरत रहती है, इनकी सप्लाई भी अटक गई है। सूबे को रोज 6 हजार मेगावाट बिजली चाहिए। अब 4 दिन का कोयला बचा है। फिलहाल बाहर से बिजली खरीद रहे।

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दिवाली, धनतेरस, करवा चौथ, गुरुपर्व को लेकर दूसरे राज्यों से आने वाला सामान 30 से 35 फीसदी तक महंगा होगा। इसमें महिलाओं का शृंगार सहित कई चीजें शामिल हैं। ट्रेडर्स का कहना है कि भाड़ा महंगा होने से माल भी महंगा बेचना पड़ेगा।

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